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Theme of the week

Issue LXXIII (24.06.2012)


Parents can bring Stars on Earth

 

The parent-child relationship is one of the most wonderful gifts to human life. While on one hand our scriptures say that the parents should be worshipped just like God, the famous poet Wordsworth on the other hand says – “A Child is the Father of the Man”. A human child is a precious gift of God to the parents.
As a child grows, he or she is expected to develop in the form of maturity, wisdom, knowledge and human qualities like patience, effective expression, ability to work hard, etc. If parents want, they can facilitate their children in growing continuously. Irrespective of the fact from where a child and his family starts socially, financially, emotionally, academically and spiritually, if the parents take the responsibility of continuous growth of the child and the whole family, things can be much different than what we see today.
If a parent works hard, the child also feels committed to make a career, if a parent is emotionally strong, it is easier for a child to keep patience. If a parent gives respect to his elders, the child also feels respect for his parents and other elders. Children tend to reflect the qualities of their parents. Once they cross the teen age and become capable of taking charge of their life in their own hands, they can even cross the expectations of their parents. However, a strong foundation for a happy and successful life is generally laid down by parents or some parental figures.
A parent is thus required to become a role-model at every step. Moreover, parents are the best source of moral support to the child. A child is able to go very far in life if he or she gets a message from at least one of the parents –“I am with you.”  However, being too much ambitious for the career of a child may put undue pressures on him.
A child is able to make fast progress and at the same time, grow in terms of maturity and wisdom if  he or she gets aligned with his or her surroundings in the family, at school, in the work place and in the society at large. The first lesson of such an integration or alignment is also given by the parents when they themselves integrate their life with the future of their children and of the family. The best option for a parent is therefore to be a devoted parent. This is one of the best ways to serve God or to serve humanity.
To be devoted to the child is not enough. A parent should also contribute in making the surroundings in which his or her children are growing and would live in future, a little more healthy. To help in reducing the poverty of people around, to help people be more truthful, hardworking and committed to overall development, to spread peace around, etc. are some of the ways through which a parent can improve the surroundings. This is as much important as taking care of the cleanliness and hygiene in the household.
If a parent continuously aligns himself with the Creator, if he or she has faith or sense of devotion, the child also grows in a way that he is comfortable with himself and is an asset to his family and to many others. If every parent of today realizes that parenthood is a gift and take it as a mission, we can gradually make the Earth free from crimes, corruption and adversities. The stars twinkle for us because they are too far. But we know they have a lot of light. If parents want, they can bring out the light- the wisdom and power hidden in human minds and make every member of tomorrow’s society much more enlightened. Every child of today can be a star tomorrow.

Hindi


माता—पिता का अपने बच्चों से संबंध मानवता के लिये एक वरदान है. जहां एक ओर हमारे शास्त्रों ने माता—पिता को पूजनीय कहा है वहीं दूसरी ओर विलियम वर्डस्वर्थ जैसे महाकवि ने बालक को माता—पिता से श्रेष्ठ बताया है. बालक—बालिका विधाता द्वारा दी गयी अमूल्य निधि है.

जैसे—जैसे एक बच्चा बङा होता जाता है, उससे भावनात्मक परिपक्वता, बुद्धि एवं मानवीय गुणों का विकास तथा विवेकशीलता की उम्मीद की जाती है. यदि माता—पिता चाहें तो वे बालक के निरंतर विकास में सहायक हो सकते हैं. बालक एवं उसका पूरा परिवार आर्थिक, सामाजिक, आध्यात्मिक एवं बौद्धिक रूप से चाहें कहीं से भी शुरुआत करें, यदि माता—पिता पूरे परिवार के विकास के लिये प्रयत्नशील रहें तो बालक स्वतः सही दिशा में विकास करता है. इस तरह एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकता है.

माता—पिता भावनात्मक रूप से परिपक्व हों तो बच्चे भी धैर्यवान होतें हैं. यदि माता—पिता अपने से बङों का सम्मान करते हैं तो बच्चे भी अपने माता—पिता व अन्य बङों के प्रति सम्मान महसूस करते हैं. बच्चे अधिकांशतः अपने माता—पिता के गुणों का आइना होते हैं. वयस्क होने के बाद जब वे अपना जीवन अपने हाथ में लेने योग्य हो जाते हैं तो कभी—कभी वे माता—पिता से श्रेष्ठ एवं उनकी अपक्षाओं से भी आगे निकल सकते हैं. किंतु एक खुशनुमा एवं सफल जीवन की नींव माता—पिता के हाथों आसानी से डाली जा सकती है. इसलिये माता या पिता को हर कदम पर अपने बच्चों के लिये एक आदर्श बनना आवश्यक है, इसके अलावा माता—पिता अपने बच्चे के लिये भावनात्मक संबल का बहुत बङा स्त्रोत होते है. बच्चा अपने जीवन में बहुत आगे जा सकता है यदि उसे यह संदेश मिलता रहे कि "मैं तुम्हारे साथ हूं". किंतु एक बच्चे के करियर के लिये अत्यधिक महत्वकांक्षी होना उस पर अनुचित दबाव डाल सकता है

यदि बच्चा परिवार, अपने आस-पास के वातावरण, अपने विद्यालय , और इन सब के साथ समाज के साथ एकीकृत हो जाये तो ना सिर्फ उस का तीव्र विकास संभव है, बल्कि उस में परिपक्वता और बुद्दिमत्ता भी तेजी से आती है| इस एकीकरण या सामंजस्य का पहला पाठ भी अभिभावक ही बच्चे तो पढ़ा सकते हैं जब वो स्वयं को परिवार और बच्चों के भविष्य के साथ एकीकृत करते हैं| एक अभिभावक के लिए शायद सबसे उपयुक्त यही है की वो स्वयं को समर्पित करे अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए| यही ईश्वर और मानवता के लिए हमारी सच्ची सेवा है|

स्वयं का समर्पण ही पर्याप्त नहीं है, माता-पिता को बच्चों के सही विकास के लिए घर एवं आस-पास का वातावरण भी ऐसा बनाना होगा जिसमे बच्चे का सही एवं सर्वांगीण विकास हो सके| समय पर लोगों की आर्थिंक या भावनात्मक मदद करना, उनसे सहानुभूति पूर्वक व्यवहार करना, ईमानदारी, सामूहिक विकास के लिए प्रयास, इत्यादि कुछ ऐसे कदम हैं जिनके द्वारा न सिर्फ हम एक अच्छे समाज का निर्माण कर सकते हैं, बल्कि अपने बच्चों तो सही वातावरण और संस्कार भी दे सकते हैं| एक अभिभावक के लिए शायद सबसे उपयुक्त यही है की वो स्वयं को समर्पित करे अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए| यही ईश्वर और मानवता के लिए हमारी सच्ची सेवा है|

यदि अभिभावक स्वयं को अपने सर्जक के साथ एकीकृत रखें, उसमें श्रद्धा एवं समर्पण का भाव रखें, तो बच्चे का विकास भी एक सकारात्मक सोच के साथ होगा और वो स्वयं को न सिर्फ परिवार के लिए, बल्कि समाज के लिए एक अमूल्य धरोहर बना पायेंगे| बच्चों की परवरिश की जो जिम्मेदारी उसे मिली है वो ईश्वर के एक वरदान की तरह है| यदि हर अभिभावक ये समझ ले तो धरती को अपराध, भ्रष्टाचार , और अन्य तमाम बुराइयों से मुक्त किया जा सकता है| तारे हमें जगमगाते दिखाई देते है क्योंकि वे हमसे बहुत दूर हैं, लेकिन हमें पता है की असल में वो प्रकाश का भण्डार हैं| अभिभावक यदि चाहें तो बच्चों में छुपे प्रकाश को जागृत कर भविष्य के समाज को प्रकाशवान और उज्जवल बना सकते हैं| आज का हर बालक आने वाले कल का सितारा है|


Your Comments


                    
Tanmay This article prooves that parent are the real shapers of the pot known as child

                    
प्रताप सिंह सच है, कल के क्षितिज पर जगमगाने वाले इन सितारों के प्रकाश पुंज उनके माता-पिता ही हैं|

                    
prerna Parents are the real creater just like the lovely god , who can save & shape our society by true love & care . Every child should get healthy enviornment to grow & glow .

                    
Mayank Just like a potter, parents give shape and strength to children. I liked this article.
 
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