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Theme of the week

Issue LXXV (08.07.2012)


Positivity Makes the Difference

 

His biological mother gave him birth only to put him for adoption… the lawyer couple who agreed to adopt him initially, later refused as they wanted a baby girl…. he had to drop out of college as his parents could not afford fees…. He was fired from his own company at the young age of 30. And he still didn’t give up. He always found something positive in all these setbacks and was able to reach heights where not everyone can think of. He was co-owner of one of world’s largest and most successful company. Yes, you got it right! Steve Jobs is this person…. a founder member of Apple.


Destiny started testing him right since he was not even born. His mother, a young student, reluctantly decided to bring him in the world and later gave to a not so well-to-do couple. He decided to drop out of college as he didn’t want to waste the hard eared savings of his parents. He decided to learn calligraphy instead, which later was used in Mac computers.

At 20 years of age he started Apple from a garage and in just 10 years, Apple was a $2 billion company with over 4000 employees on roll. And at this stage, he was asked to leave the company?? He accepted this too, started another company, another legend, NeXT which was later acquired by Apple and Steve returned to Apple.

Positivity can change worst in life into opportunity. It brings strength, energy and initiative. Life of Steve is an example of positivity and a lesson for us. Our perception and attitude towards things is what makes us successful and happy.

We have many such examples… Legendry businessman Dhirubhai Ambani, G.D Birla, Bill Gates, Father of our nation, Mahatma Gandhi, all started small but had one thing in common – Positivity. In fact every successful man has this attitude. Good and bad times are bound to come our way, how we react in each of these situations, makes us different from each other.

Hindi


माँ ने उसे जन्म दिया किसी और को गोद देने के लिए..... जिस वकील दम्पत्ति ने उसे गोद लेने का वादा किया था बाद में उसने इसलिए मना कर दिया क्योंकि उन्हें एक लड़की चाहिए थी....कॉलेज की पढ़ाई बीच में इसलिए छोड़नी पड़ी क्योंकि उनके माता-पिता कॉलेज फीस का खर्चा नहीं उठा सकते थे....अपनी ही कंपनी से उन्हें निकाल दिया गया सिर्फ ३० साल की उम्र में... पर उन ने हार नहीं मानी| हर विपरीत परिस्थिति में उस ने कुछ सकारात्मक ढूंढ निकाला और उन ऊँचाइयों को हासिल किया जहाँ पहुँचने की हर कोई कल्पना भी नहीं पाता ! ये शख्स दुनिया की सबसे बड़ी कंप्यूटर निर्माता कंपनियों में से एक का साझीदार था जिसने इस कंपनी की नीवं रखी थी| जी हाँ, आप का अंदाज़ा सही है, हम बात कर रहे हैं ऐपल कंप्यूटर के सनस्थापक स्टीव जोब्स की|

किस्मत ने उनका इम्तेहान उनके जन्म से पहले से ही लेना शुरू कर दिया| उनकी माँ, जो अभी एक छात्रा थी, ने बेमन से उन्हें जन्म देने का निर्णय किया और जन्म के बाद एक साधारण दम्पत्ति को गोद दे दिया | छह महीने बाद ही उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई छोड़ देने का निश्चय किया क्योंकि वो नहीं चाहते थे की उनके माता-पिता की जीवन भर की बचत उनकी पढ़ाई में बर्बाद हो जाये | इसकी जगह उन्होंने काल्लिग्राफी सीखने का निश्चय किया जो बाद में ऐपल कंप्यूटर में सबसे पहले इस्तेमाल हुई |

बीस साल की उम्र में स्टीव जोब्स ने एक और मित्र के साथ मिलकर अपने माता-पिता के गराज से ऐपल कंपनी की स्थापना की | दस साल में ही ये २०० करोड़ डॉलर की कंपनी बन चुकी थी और ४००० कर्मचारी इस में काम कर रहे थे | और इस मुकाम तक पहुंचे के बाद कंपनी से उन्हें निकाल दिया गया ! स्टीव ने इसे भी स्वीकार किया और एक नई शुरूआत की | एक नई कंपनी, नेक्स्ट की स्थापना की जिसे बाद में ऐपल ने ही खरीद लिया और स्टीव की ऐपल में वापसी हुई |

सकारात्मकता बाधाओं को सुअवसर में बदल देती है | ये शक्ति, ऊर्जा, और अवसर लाती है | स्टीव की कहानी सकारात्मकता का एक जीता जागता उदाहरण है और हम सब के लिए एक प्रेरणा | चीज़ों के बारे में हमारी प्रवृति और समझ ही हमें सफल और आनंदित कर सकती है |

हमारे सामने ऐसे अनेक उदाहरण हैं.... विख्यात उद्यमी धीरू भाई अम्बानी, जी. डी. बिड़ला, बिल गेट्स, हमारे राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी.... सभी ने एक छोटी शुरूआत की और सभी में एक बात सामान थी, सकारात्मकता | असल में हर सफल इंसान में ये प्रवृति होती है | अच्छा और बुरा समय हर इंसान की ज़िन्दगी में आता है, अलग-अलग परिस्थितियों में हम कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, वही हमें एक-दुसरे से अलग करती है |


Your Comments


                    
shivangi pantawane really nice1 true which held with evry1 whn startd new step to our life

                    
abc This write up is quite reassuring and teaches us to believe in self.
 
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